सनातन धर्म की आयु
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सनातन धर्म तो अनन्त है, तो इसकी आयु का अनुमान लगाना तो मूर्खता ही होगी पर आईये जानते है हमारे वेद और पुराणों के अनुसार सृष्टि की आयु कितनी है? वेदों और पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी की आयु में ही सृष्टि की आयु छिपी हुई है या यूं कहें कि ये एक सांकेतिक तरीका है सृष्टि की आयु को समझने के लिए. तो आइए जानते है कि इस सृष्टि की वर्तमान आयु कितनी है?
हमारे पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी की आयु 100 दिव्य वर्षों की है। जिसमे में से उनके 50 वर्ष व्यतीत हो चुके है यानी की 155 खरब साल बीत चुके है। ये तो हुआ बीते हुए कल्पों की बात अब आईये जानते है वर्त्तमान कल्प के बारें मे। ब्रह्मा जी की आयु दो कल्पों में बनी हुई है। उनका 1 दिन दो कल्पों का होता ह। उनका एक कल्प या आधा दिन 4,32,000,0000 वर्षों का होता है जिसमे 14 मनु शासन करते है और पुरा एक दिन 8,64,000,0000 वर्षों का होता है। अब आइये समझते है इकाइयों को:
यहाँ ये बात ध्यान रखें की देवताओं के वर्ष में 365 नही 360 दिन होते है और जब मनुष्यों का एक वर्ष पूरा होता है तो देवराओं का एक दिन पूरा होता है।
यानी की 360 मानव वर्ष = 1 दिव्य वर्ष
इसके अनुसार:
सत्य युग = 4800 दिव्य वर्ष = 17,28,000 वर्ष
त्रेता युग = 3600 दिव्य वर्ष = 12,96,000 वर्ष
द्वापर युग = 2400 दिव्य वर्ष = 8,64,000 वर्ष
कलियुग = 1200 दिव्य वर्ष = 4,32,000 वर्ष
अब चरों युगों की आयु को अगर जोड़ते है तो वो आ जाता है एक महायुग की आयु
= 17,28,000+12,96,000+8,64,000+4,32,000
= 43,20,000 वर्ष
अब एक मन्वन्तर में होते है 71 महायुग तो
= 43,20,000*71
=30,67,20,000
अर्थात एक मन्वन्तर में 30,67,20,000 वर्ष होते है
अभी तक 6 मन्वन्तर बीत चुके है, ये 7वां अर्थात् वैवस्वत मन्वन्तर चल रहा है तो
= 30,67,20,000*6
= 1,84,03,20,000 वर्ष
अभी इस मन्वन्तर के 27 महायुग बीत चुके है और 28वें के सत्ययुग, त्रेता और द्वापर भी बीत चुके है तो पहले हम 27 महायुग की आयु जोड़ लेते है तो
= 43,20,000*27
= 11,66,40,000
1 सत्य युग, 1 त्रेता और एक द्वापर की आयु इसमें जोड़ देंगे. चूंकि अभी 28 वां कलियुग चल रहा है इसलिए उसकी जो वर्तमान आयु है 5,124 वर्ष वो भी इसमें जोड़ देंगे to
11,66,40,000 + (17,28,000+12,96,000+8,64,000+5,124)
यानी कि 27 महायुगों का जोड़ तथा एक -एक सत्य युग, त्रेता और द्वापर युग तथा वर्तमान कलियुग के 5,124 वर्षों के समय को जोड़ेंगे।
11,66,40,000 + 38,88,000 + 5124
12,05,33,124
अब छः मन्वंतर और वर्तमान मन्वंतर के समय को जोड़ देंगे
1,84,03,20,000 + 12,05,33,124
= 1,96,08,53,124 वर्ष बीत चुके है इस श्वेत वाराह कल्प के।
ये तो सिर्फ इस कल्प की आयु हुई, अगर हम शुरू से जोड़ें तो ये संख्या खरबों से पार हो जाएगी। तो आइये जानते है:
पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी की आयु कुल 100 दिव्य वर्षों की है जिसमे से 50 वर्ष बीत चुके है और ये 51वां साल का पहला दिन चल रहा है। अर्थात अगर हम उनकी आयु को मानव वर्षों में परिवर्तित करें तो वो होगी
ब्रह्मा जी का एक दिन मानव वर्षों के अनुसार (दिन+रात)= 8,64,0000000 तो,
चूँकि उनका एक दिन, एक मानव वर्ष के बराबर होता है जिसमे 360 दिन होते है इसलिए
उनका एक वर्ष = 8,64,0000000*360
= 31,10,40,00,00,000
अतः उनका एक वर्ष हुआ 31 खरब, 10 अरब, 40 करोड़ वर्ष का
अब उनकी 100 वर्ष के हिसाब से आयु निकलते है जो की है:
31,10,40,00,00,000*100
31,10,40,00,00,00,000
अर्थात 31 नील, 10 खरब, 40 अरब वर्ष
अब हम उनकी वर्त्तमान आयु निकलते है:
50 वर्ष तक की आयु:
= 31,10,40,00,00,000*50
= 15,55,20,00,00,00,000 वर्ष
= 15 नील, 55 खरब, 20 अरब वर्ष
अब चूँकि ये उनका 51वां वर्ष का प्रथम दिवस चल रहा है इसलिए:
50 वर्ष का समय + 12,05,33,124 (इस कल्प के 27 महायुगों का जोड़ (11,66,40,000) और 28 वें महायुग के सत्य युग (17,28,000), त्रेता युग (12,96,000) तथा द्वापर युग (8,64,000)और वर्त्तमान कलियुग के 5,124 वर्ष )
= 15,55,20,00,00,00,000 + 12,05,33,124
= 15,55,20,12,05,33,124
तो इस सृष्टि की वर्तमान आयु कितनी हुई?
वो हुई 15,55,20,12,05,33,124
अर्थात
15 नील, 55 खरब, 20 अरब 12 करोड़ 5 लाख 33 हजार 124 वर्ष
अंग्रेजी में कहे तो
155 Trillion years
अब जानते है की और कितने दिन बचे है ब्रह्मा के जीवन के
= 31,10,40,00,00,00,000 - 15,55,20,12,05,33,124
= 15,55,19,87,94,66,876
तो अभी 15 नील 55 खरब 19 अरब 87 करोड़ 94 लाख 66 हजार और 876 वर्ष ये सृष्टि चलेगी फिर नए ब्रह्मा आएंगे
और ये तो सिर्फ इस सृष्टि की आयु है, ऐसे तो अनंत ब्रह्माण्ड है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते।
प्रमाण: आपने कभी ना कभी यज्ञ के संकल्प मंत्र पर अवश्य ध्यान दिया होगा, इसमें आपको एक ही श्लोक में पूरा उत्तर मिल जायेगा
संकल्प मंत्र:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : 2080, तमेऽब्दे प्लवंग नाम संवत्सरे दक्षिणायने ……. ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे ……. मासे …… पक्षे …….. तिथौ ……. वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री ……….. (जिस देवी.देवता की पूजा कर रहे हैं उनका नाम ले)पूजनं च अहं करिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन निर्विघ्नतापूर्वक कार्य सिद्धयर्थं यथामिलितोपचारे गणपति पूजनं करिष्ये।

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