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Do Hindu Scriptures Really Support Meat Consumption - Debunking Dhruv Rathee Myths

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आज के डिजिटल युग में यह देखा जा रहा है कि कुछ कंटेंट क्रिएटर्स स्वयं को तटस्थ या तार्किक या नास्तिक बताते हुए धार्मिक विषयों पर चर्चा करते हैं, लेकिन हर बार उनकी प्रस्तुति एकतरफा या या यूं कहे कि सिर्फ हिन्दू धर्म के लिए ही होती है। हाल ही में Dhruv Rathee द्वारा उनके YouTube चैनल पर एक  वीडियो  प्रस्तुत किया गया, जिसमें हिन्दू शास्त्रों—विशेषकर रामायण और महाभारत—के कुछ श्लोकों के आधार पर मांसाहार और मदिरापान से जुड़े दावे किए गए। ऐसे दावों की सत्यता को समझने के लिए जब संबंधित श्लोकों को मूल ग्रंथों में देखा गया, तो कई स्थानों पर व्याख्या संदर्भ से अलग या अपूर्ण प्रतीत होती है। उदाहरण के रूप में: द्रोण पर्व के एक श्लोक (73.25–28) में यह कहा गया कि अर्जुन मांसाहार का समर्थन कर रहे हैं, जबकि मूल पाठ में ऐसा उल्लेख नहीं मिलता। महाभारत के उद्योग पर्व के एक श्लोक (58.5) को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि श्रीकृष्ण और अर्जुन मदिरापान कर रहे थे, जबकि “मधु” या “मध्वासव” जैसे शब्दों के अर्थ संदर्भ के अनुसार भिन्न हो सकते हैं । रामायण के अयोध्या कांड के (52.89) श्लोक को इस तरह प्रस्तुत क...

मानव जीवन के तीन प्रकार के ऋण अथवा ऋणत्रय

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भारतीय संस्कृति के अनुसार मनुष्य जन्म लेते ही अपने देवों, ऋषियों और पितरों के प्रति ऋणी हो जाता है। इसीलिए उपनयन संस्कार के अवसर पर ब्रह्मचारी का जो तीन सूत्रों वाला यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है, उसके तीन सूत्र ऋणत्रय के ही प्रतिक होते हैं। इन तीनो ऋणों से मुक्त होने का वर्णन विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों में मिलता हैं। देवनाम् च पितृणाम् च ऋषिनाम् च तथा नरः।  ऋणवान जायते यासमत तनमोक्षे प्रयतेत सदा।।  __ विष्णु धर्मोत्तर पुराण महर्षिपितृदेवानां गत्वानृण्यं यथाविधि।  पुत्रे सर्वं समासज्य वसेन्माध्यस्थ्यं आश्रितः।।  ___ मनुस्मृति ४.२५७ निवापनेन पितरो विद्याभ्यास श्रावणधारणेन ऋषयः।  अपत्योत्पादनेन प्रजापतिरिति ॥ ___ महाभारत, शांति पर्व १९१.१३ देव ऋण मनुष्य दिव्यशक्तियों के कारण ही उपलब्ध सृष्टि के संसाधनों का उपयोग कर पाता है। ईश्वर की कृपा से ही उसे स्वच्छ वायु, जल, प्रकाश और ऊर्जा मिल पाती है। अतः मनुष्य को ईश्वर तथा देवों के प्रति ऋणी होना चाहिए और यज्ञों व देवस्तुतियों द्वारा देवऋण से मुक्त होने का प्रयत्न करना चाहिए।  ऋषि ऋण ब्रह्मचर्य आश्रम में मनुष्य ऋषियों...

Why there are always a Round Circle behind the Head of Gods and Goddesses?

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Do you know about 7 chakras? There are 7 chakras in our body, and it is also related to that round circle depicted behind the head in every idol of God and Goddesses. Watch the full video to know why it is so. Image Credit: News18

What are Your Reviews about Adipurush?

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हालहीं में आई फिल्म तो आप सब ने देखी ही होगी और अगर नहीं देखी तो उसके बारें में सुना तो अवश्य ही होग। ये फिल्म अच्छी तरह साबित करती है की "अभिव्यक्ति की आज़ादी" के नाम पर ये लोग आपको कुछ भी दिखा सकते है, जिसका ना तो तथ्य से कोई लेना-देना है और ना ही इतिहास से। आप सब तो समझ ही गए होंगे की मैं किसकी बात कर रहा हूँ, जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ "आदिपुरुष" की। इस फिल्म में कुछ नहीं है, कुछ भी नहीं, ना तो इस फिल्म की पटकथा सही है, ना कलाकारों का अभिनय, ना कलाकारों की वेशभूषा और तथ्यों से तो इतना छेड़छाड़ हुआ है की अगर रामायण का जानकार इस फिल्म को देखने जाएं तो शुरूआती 15 मिनट में ही वो सिनेमा हॉल से बाहर भाग जाए। इसमें गलतियां ही गलतियां भरी हुई है, कुछ सही है ही नहीं इसमे। अच्छा चलिए कुछ नहीं तो कम से कम संवाद(Dialogues) तो सही से लिख लेते, वो भी इतने निम्न स्तर के है जैसे लगता है की ये फिल्म भगवान पर नहीं किन्ही छपरियों पे हो। खैर, ये सब कोई नहीं बात नहीं है, आये दिन हमारे देवी-देवताओं के साथ ऐसे भद्दे मज़ाक तो होते ही रहते है, और ये सब करने में कोई बाहर वाला नहीं हमारे अपने...

सनातन धर्म की आयु

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नोट: कृपया कॉपी पेन लेकर बैठे बहुत लम्बी कैलकुलेशन है। सनातन धर्म तो अनन्त है, तो इसकी आयु का अनुमान लगाना तो मूर्खता ही होगी पर आईये जानते है हमारे वेद और पुराणों के अनुसार सृष्टि की आयु कितनी है? वेदों और पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी की आयु में ही सृष्टि की आयु छिपी हुई है या यूं कहें कि ये एक सांकेतिक तरीका है सृष्टि की आयु को समझने के लिए. तो आइए जानते है कि इस सृष्टि की वर्तमान आयु कितनी है? हमारे पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी की आयु 100 दिव्य वर्षों की है। जिसमे में से उनके 50 वर्ष व्यतीत हो चुके है यानी की 155 खरब साल बीत चुके है।  ये तो हुआ बीते हुए कल्पों की बात अब आईये जानते है वर्त्तमान कल्प के बारें मे। ब्रह्मा जी की आयु दो कल्पों में बनी हुई है। उनका 1 दिन दो कल्पों का होता ह।  उनका एक कल्प या आधा दिन 4,32,000,0000 वर्षों का होता है जिसमे 14 मनु शासन करते है और पुरा एक दिन 8,64,000,0000 वर्षों का होता है। अब आइये समझते है इकाइयों को: यहाँ ये बात ध्यान रखें की देवताओं के वर्ष में 365 नही 360 दिन होते है और जब मनुष्यों का एक वर्ष पूरा होता है तो देवराओं का एक दि...

108 Names of Lord Shiva

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No. Sanskrit Name English Name                    Meaning 1 शिव                         Shiva                                              Always Pure 2 महादेव                 Mahadeva                                    Greatest of the Gods 3 कठोर                 Kathor                                            The God Who Has A Strong Body 4 महेश्वर                 Maheshwara ...

A Brief Introduction of Hinduism

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H induism is an Indian religion that originated in the Indian sub-continent. It is one of the four major Indian religion instead of Buddhism, Sikhism & Jainism. It is the world's oldest religion with roots and customs dating back more than 4,000 years ago according to many scholars. It is practiced mainly in South Asia especially in India. Many practitioner refer to it as Sanatan Dharm (the eternal religion) as it is believed by many followers that it is a way of life more than a religion. It is one of the three major religions in the world after Christianity and Islam with approx. 1.3 billion followers across the globe. Did you know that 94% of global Hindu population lives in India making it India's majority religion with having 1.2 billion followers & almost 80% of Indian population. There are many deities worshiped in Hinduism but the total number of deities are only 33 i.e. there are 33 koti(types) of deities in Hinduism and others are avatars(incarnation) or human...