What are Your Reviews about Adipurush?
हालहीं में आई फिल्म तो आप सब ने देखी ही होगी और अगर नहीं देखी तो उसके बारें में सुना तो अवश्य ही होग। ये फिल्म अच्छी तरह साबित करती है की "अभिव्यक्ति की आज़ादी" के नाम पर ये लोग आपको कुछ भी दिखा सकते है, जिसका ना तो तथ्य से कोई लेना-देना है और ना ही इतिहास से। आप सब तो समझ ही गए होंगे की मैं किसकी बात कर रहा हूँ, जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ "आदिपुरुष" की। इस फिल्म में कुछ नहीं है, कुछ भी नहीं, ना तो इस फिल्म की पटकथा सही है, ना कलाकारों का अभिनय, ना कलाकारों की वेशभूषा और तथ्यों से तो इतना छेड़छाड़ हुआ है की अगर रामायण का जानकार इस फिल्म को देखने जाएं तो शुरूआती 15 मिनट में ही वो सिनेमा हॉल से बाहर भाग जाए। इसमें गलतियां ही गलतियां भरी हुई है, कुछ सही है ही नहीं इसमे। अच्छा चलिए कुछ नहीं तो कम से कम संवाद(Dialogues) तो सही से लिख लेते, वो भी इतने निम्न स्तर के है जैसे लगता है की ये फिल्म भगवान पर नहीं किन्ही छपरियों पे हो। खैर, ये सब कोई नहीं बात नहीं है, आये दिन हमारे देवी-देवताओं के साथ ऐसे भद्दे मज़ाक तो होते ही रहते है, और ये सब करने में कोई बाहर वाला नहीं हमारे अपने...